जल जीवन के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। सिंचाई की तेज़ गति, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण ने जल संसाधनों पर बहुत दबाव डाला है। इस बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन के ज्यादा इस्तेमाल के संचयी प्रभाव के कारण देश के कई क्षेत्रों में जल की कमी हो गई है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण देश में हाइड्रोलॉजिक चक्र में भी बदलाव आया है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि इस दुर्लभ संसाधन को टिकाऊ विकास के लिए ठोस वैज्ञानिक पद्धति पर प्रभावी और कुशल प्रबंधन के ज़रिये सुरक्षित किया जाए।